झाबुआ। मध्यप्रदेश सरकार के "स्वस्थ यकृत मिशन" के तहत आज ग्लोबल फैटी लिवर दिवस के अवसर पर झाबुआ में एक विशाल जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। इस रैली का उद्देश्य लोगों को नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) के प्रति सचेत करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में एक नई पहल करते हुए झाबुआ जिले में ग्लोबल फैटी लिवर दिवस के अवसर पर एक भव्य जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। यह रैली "स्वस्थ यकृत मिशन" के अंतर्गत निकाली गई, जो मध्यप्रदेश शासन द्वारा शुरू किया गया एक अभिनव अभियान है, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों को फैटी लिवर जैसी गंभीर लेकिन प्रायः अनदेखी जाने वाली बीमारी के प्रति जागरूक बनाना है।
फैटी लिवर: एक मूक महामारी
आधुनिक जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतों के कारण फैटी लिवर की बीमारी तेजी से फैल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर तीसरा व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित है, जो आगे चलकर लिवर सिरोसिस, डायबिटीज और हृदय रोगों का कारण बन सकती है। स्वस्थ यकृत मिशन की शुरुआत 21 मई 2025 को मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा की गई थी। इस मिशन का उद्देश्य है – नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) जैसी बीमारियों की समय रहते पहचान करना, रोकथाम सुनिश्चित करना और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाकर जनता को स्वस्थ रखना। आज की इस तेज़ रफ्तार जिंदगी में, जहां जंक फूड और शारीरिक निष्क्रियता ने जगह बना ली है, वहां फैटी लिवर एक ‘साइलेंट किलर’ के रूप में उभर रहा है। यह बीमारी बिना किसी लक्षण के यकृत को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है और आगे चलकर यह सिरोसिस, लिवर फेल्योर और यहां तक कि लिवर कैंसर का कारण बन सकती है। इस दिशा में स्वस्थ यकृत मिशन एक सार्थक कदम है।
झाबुआ में हुई जागरूकता रैली
ग्लोबल फैटी लिवर दिवस के उपलक्ष्य में 12 जून की सुबह झाबुआ शहर के हृदयस्थल – राजवाड़ा चौक से जागरूकता रैली की शुरुआत की गई। रैली का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.एस. बघेल ने हरी झंडी दिखाकर किया। रैली आजाद चौक, थांदला गेट, बस स्टैण्ड होते हुए जिला चिकित्सालय परिसर में जाकर समाप्त हुई। रैली में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, नर्सिंग महाविद्यालय की छात्राएँ, एवं विभिन्न विभागों के कर्मचारी शामिल हुए। सभी ने हाथों में स्लोगन बोर्ड, पोस्टर और बैनर लेकर आम नागरिकों को फैटी लिवर के कारण, लक्षण, बचाव और नियंत्रण के तरीकों के बारे में जागरूक किया। “यकृत को स्वस्थ रखो, जीवन को लम्बा करो”, “नियमित व्यायाम – स्वस्थ यकृत का आधार” जैसे नारों के माध्यम से लोगों का ध्यान इस ओर खींचा गया।
जिला अस्पताल में आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम
रैली के बाद जिला चिकित्सालय में एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया, जहाँ डॉ. बी.एस. बघेल ने लोगों को फैटी लिवर के खतरों और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, "फैटी लिवर की समस्या मुख्य रूप से असंतुलित आहार, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और मधुमेह के कारण होती है। अगर समय रहते सचेत नहीं हुए, तो यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। लेकिन नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और शराब से परहेज करके इससे बचा जा सकता है।" उन्होंने यह भी बताया कि स्वस्थ यकृत मिशन के तहत जिले भर में निशुल्क जांच शिविर और स्वास्थ्य परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि यकृत शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है जो विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है, पाचन में सहायक एंजाइम बनाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। यदि इसका ख्याल न रखा जाए तो यह धीरे-धीरे खराब हो सकता है।
इन अधिकारियों ने लिया भाग
इस कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री आर.आर. खन्ना, जिला एम एंड ई अधिकारी श्री प्रणय टेम्भरे, जिला सीपीएचसी सलाहकार श्री कैलाश चरपोटा, एनसीडी डाटा एंट्री ऑपरेटर श्री प्रवीण यादव सहित शासकीय नर्सिंग कॉलेज के छात्र-छात्राएं और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे।
फैटी लिवर से बचाव के उपाय
- संतुलित आहार लें – ताजे फल, हरी सब्जियां और फाइबर युक्त भोजन करें।
- शुगर और तली-भुनी चीजों से परहेज करें – जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक्स से दूर रहें।
- रोजाना व्यायाम करें – कम से कम 30 मिनट टहलें या योग करें।
- वजन नियंत्रित रखें – मोटापा फैटी लिवर का प्रमुख कारण है।
- शराब और धूम्रपान से बचें – ये लिवर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाते हैं।
- नियमित जांच कराएं – खासकर डायबिटीज और हाई बीपी के मरीजों को लिवर फंक्शन टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
फैटी लिवर: एक अदृश्य खतरा
फैटी लिवर बीमारी का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह बिना किसी लक्षण के विकसित होती है, और जब तक मरीज को इसका पता चलता है, तब तक यकृत को गंभीर क्षति हो चुकी होती है। भारत जैसे विकासशील देश में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है और आने वाले समय में यह एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है।
आंकड़े बताते हैं:
भारत में हर 5 में से 1 व्यक्ति फैटी लिवर से ग्रस्त है। शहरी क्षेत्रों में यह दर और भी अधिक है, विशेषकर मोटापे और डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में।
स्वस्थ यकृत मिशन का मूल संदेश यही है – जीवनशैली में परिवर्तन ही इस बीमारी से बचाव का रास्ता है। यह मिशन केवल उपचार पर नहीं, बल्कि रोकथाम पर केंद्रित है। यह न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाएगा बल्कि स्वस्थ समाज निर्माण की दिशा में भी योगदान देगा। स्वस्थ यकृत मिशन एक सराहनीय पहल है, जिसके माध्यम से लोगों को फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है। आज की रैली और जागरूकता कार्यक्रम ने झाबुआ के नागरिकों को इस बीमारी से बचने के लिए प्रेरित किया है। अगर हम सही खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, तो न केवल फैटी लिवर बल्कि कई अन्य बीमारियों से भी बचा जा सकता है। सरकार का यह मिशन निश्चित रूप से एक स्वस्थ और निरोगी मध्यप्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
