झाबुआ पुलिस का बड़ा एक्शन: एसपी ने अपराधियों के लिए बनाई 'जीरो टॉलरेंस' रणनीति

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महिला सुरक्षा से लेकर नारकोटिक्स तक: झाबुआ एसपी ने बैठक में उठाए ये अहम मुद्दे

Jhabua First News- Jhabua Superintendent of Police called a special strategic meeting regarding crime control, stressed on women safety and prompt resolution of pending cases- झाबुआ पुलिस अधीक्षक ने अपराध नियंत्रण को लेकर बुलाई विशेष रणनीतिक बैठक, महिला सुरक्षा व लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण पर दिया ज़ोर




झाबुआ। जिले की कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने, पुलिस की कार्यप्रणाली को प्रभावी दिशा देने और अपराध पर लगाम कसने के उद्देश्य से आज झाबुआ जिले के पुलिस अधीक्षक श्री पद्मविलोचन शुक्ल द्वारा एक महत्त्वपूर्ण क्राइम समीक्षा बैठक का आयोजन जिला मुख्यालय स्थित पुलिस कंट्रोल रूम में किया गया। इस अहम बैठक में जिले के सभी पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओपी), थानों के प्रभारी अधिकारी, चौकी प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। 

बैठक का उद्देश्य और प्राथमिक एजेंडा

बैठक का मूल उद्देश्य जिले के भीतर बढ़ते अपराधों की रोकथाम, महिला एवं बाल सुरक्षा को प्राथमिकता देने, पुलिसिंग व्यवस्था में सुधार लाने और लंबित प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर व्यापक रणनीति बनाना रहा। पुलिस अधीक्षक श्री शुक्ल ने बैठक की शुरुआत करते हुए यह स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में पुलिस की जिम्मेदारी केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास को बनाए रखना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि जिला पुलिस को अब ‘प्रतिक्रिया’ के बजाय ‘पूर्व सक्रियता’ के सिद्धांत पर काम करना होगा। इसका अर्थ है – अपराध घटने से पहले ही उसे रोकने के प्रयास किए जाएं।

लंबित मामलों पर विशेष निर्देश

बैठक के दौरान सभी थानों और चौकियों से प्राप्त आंकड़ों की समीक्षा करते हुए पुलिस अधीक्षक ने चिंता जताई कि जिले में अभी भी कई मामले लंबित पड़े हैं, जिनका समय पर निराकरण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि सभी थाना प्रभारी लंबित समंस और वारंटों की शीघ्रता से तामीली सुनिश्चित करें। इसके साथ ही CM हेल्पलाइन, एनसीआरपी पोर्टल, सीईआईआर पोर्टल जैसे डिजिटल माध्यमों से प्राप्त शिकायतों की अनदेखी न करते हुए, निर्धारित समय सीमा में समाधान सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया गया।

महिला एवं बाल सुरक्षा – एक संवेदनशील प्राथमिकता

बैठक के दौरान महिला संबंधी अपराधों की विस्तृत समीक्षा की गई। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि महिला सुरक्षा सिर्फ एक कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामाजिक कर्तव्य भी है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि किसी भी महिला से संबंधित अपराध की जांच को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लिया जाए। उन्होंने अपहरण की घटनाओं, विशेषकर नाबालिग बालक-बालिकाओं के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। थाना प्रभारियों को आदेश दिया गया कि वे अपहृत बच्चों की शीघ्र बरामदगी सुनिश्चित करें और परिजनों को समय-समय पर अद्यतन जानकारी दें।

अपराधियों पर कड़ी निगरानी और असामाजिक गतिविधियों पर नकेल

श्री शुक्ल ने जिले के सभी थानों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि उनके क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों की एक अद्यतन सूची तैयार की जाए। इन अपराधियों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जाए और जैसे ही कोई संदेहास्पद गतिविधि सामने आए, तुरंत कानूनी कार्यवाही प्रारंभ की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यह आवश्यक है कि अपराधियों को यह संदेश जाए कि कानून की पकड़ से बचा नहीं जा सकता। उन्होंने थाना प्रभारियों को यह सलाह दी कि अपने क्षेत्र के खतरनाक और पुराने अपराधियों की गतिविधियों की गुप्त तरीके से निगरानी रखी जाए और ज़रूरत पड़ने पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करें।

मादक पदार्थों, अवैध हथियार और जुआ-सट्टा पर विशेष अभियान

बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि जिले के कुछ क्षेत्रों में मादक पदार्थों की आपूर्ति, अवैध हथियारों का उपयोग, और जुए-सट्टे जैसे अपराधों की घटनाएं सामने आ रही हैं। पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिया कि इन असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ सघन अभियान चलाए जाएं। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों का नेटवर्क युवा पीढ़ी को बर्बादी की ओर धकेल रहा है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सभी थाना क्षेत्रों में नियमित छापेमारी, संदिग्धों की जांच और गुप्त सूचना तंत्र को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए।

पुलिसिंग में टेक्नोलॉजी का प्रभावी उपयोग

श्री शुक्ल ने पुलिसकर्मियों को आधुनिक तकनीकी उपकरणों के प्रभावी उपयोग की भी सलाह दी। उन्होंने बताया कि अब पुलिसिंग केवल शारीरिक मौजूदगी पर निर्भर नहीं रह सकती, बल्कि डिजिटल फोरेंसिक, सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण, डाटा एनालिटिक्स और साइबर तकनीक को अपनाना होगा।उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम की मॉनिटरिंग यूनिट को अधिक सशक्त बनाने, शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की नियमित जांच और खराब कैमरों की मरम्मत के निर्देश भी दिए।

बैठक के अंत में श्री शुक्ल ने सभी अधिकारियों को यह भी याद दिलाया कि एक पुलिस अधिकारी के लिए ‘कर्तव्यपरायणता’ के साथ-साथ ‘मानवता’ भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आम जनता के साथ संवाद स्थापित करें, उनकी समस्याओं को सहानुभूतिपूर्वक सुनें और उन्हें त्वरित न्याय दिलाएं। इस उच्च स्तरीय क्राइम बैठक में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति ने इसे और भी प्रभावी बना दिया। बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रेमलाल कुर्वे, एसडीओपी झाबुआ श्रीमती रूपरेखा यादव, एसडीओपी पेटलावद श्री कमलेश शर्मा, एसडीओपी थांदला श्री नीरज नामदेव, उप पुलिस अधीक्षक श्री गिरीश कुमार जेजुरकर सहित समस्त थाना एवं चौकी प्रभारियों ने भाग लिया। बैठक के समापन पर यह निर्णय लिया गया कि आने वाले दिनों में जिले में पुलिस जनता संवाद बैठकों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आम नागरिकों से सीधे संवाद कर उनके सुझावों को सुना जाएगा। इससे पुलिस प्रशासन और समाज के बीच सहयोग की भावना मजबूत होगी और अपराध नियंत्रण में और अधिक सफलता मिल सकेगी। पुलिस अधीक्षक श्री शुक्ल ने बैठक के अंत में सभी अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य जनता की सुरक्षा और उनके विश्वास को कायम रखना है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि झाबुआ जिले में कानून-व्यवस्था बेहतर हो और आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण मिले। इसके लिए हमें मिलकर काम करना होगा और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी होगी।"

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