रतलाम संसदीय क्षेत्र में विकास की समीक्षा बैठक सम्पन्न: जनकल्याणकारी योजनाओं की गूंज और उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान

Development review meeting concluded in Ratlam parliamentary constituency: Echo of public welfare schemes and honouring those who did excellent work.
झाबुआ फर्स्ट

Jhabua First News- Development review meeting concluded in Ratlam parliamentary constituency: Echo of public welfare schemes and honouring those who did excellent work-  रतलाम संसदीय क्षेत्र में विकास की समीक्षा बैठक सम्पन्न: जनकल्याणकारी योजनाओं की गूंज और उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान


झाबुआ। रतलाम संसदीय क्षेत्र में समग्र विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला समन्वय एवं मूल्यांकन समिति (दिशा) की महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन कलेक्टर सभाकक्ष में किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता सांसद श्रीमती अनीता नागरसिंह चौहान ने की। इस अवसर पर जिले के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा की गई तथा जनता तक उनकी पहुँच और प्रभाव को समझने का प्रयास किया गया।

बैठक का उद्घाटन और प्रारंभिक दिशा-निर्देश

बैठक की शुरुआत में कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि "दिशा समिति की यह बैठक जिले के विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हमें यह सुनिश्चित करना है कि सभी योजनाएं जमीन पर सही तरीके से लागू हों और आम जनता तक उनका लाभ पहुंचे।"सांसद श्रीमती चौहान ने अपने संबोधन में कहा "हमारा उद्देश्य झाबुआ को एक आदर्श जिला बनाना है। इसके लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा और जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान निकालना होगा।"

विभागवार समीक्षा और निर्णय

कृषि विभाग: खरीफ सीजन की तैयारियों पर विशेष जोर

बैठक की शुरुआत कृषि विभाग से हुई, जहां उपसंचालक श्री एन एस रावत ने बताया कि आगामी खरीफ सीजन में कपास की खेती का दायरा 12 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। साथ ही, यह भी उल्लेख किया गया कि पारंपरिक डीएपी उर्वरक के स्थान पर एनपीके जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि भूमि की उर्वरता बनी रहे और उत्पादन में वृद्धि हो।

पुसा-16 बीज की उपयोगिता और उसके फैलाव के लिए जिले में विशेष अध्ययन किया गया है। इस किस्म को 6 विकासखंडों में प्रयोग के तौर पर अपनाया गया और वर्ष 2025 के अंत तक इसका रकबा 2000 हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।सांसद श्रीमती चौहान ने इस योजना की गहराई से जानकारी लेते हुए बीज की उपलब्धता को प्राथमिकता देने और इसके प्रचार-प्रसार हेतु विशेष ग्राम सभाएं आयोजित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर नेहा मीना ने विभाग को किसानों तक जागरूकता पहुंचाने और उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाने की सलाह दी। 

विद्युत विभाग: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली की बेहतर आपूर्ति

मध्यप्रदेश विद्युत मंडल के अधीक्षण यंत्री द्वारा बैठक में बताया गया कि शहरी इलाकों में IPDS (Integrated Power Development Scheme) और ग्रामीण क्षेत्रों में दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत अधिकांश कार्य पूरे किए जा चुके हैं। रिपेम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत तीन उपकेंद्रों – पीपलखुटा, सेमलिया और रजला – में कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया है, जबकि मठमठ में जून माह के अंत तक काम पूरा कर लिया जाएगा। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत अब तक 300 में से 103 उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाया गया है। हालांकि, सांसद ने जिन दो एजेंसियों ने कार्यों को समयसीमा में पूरा नहीं किया, उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी। जवाब में बताया गया कि उनके ऊपर 5 प्रतिशत की पेनल्टी लगाई गई है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत जिले के 587 दूरस्थ बसाहटों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है, जिनमें सड़क संपर्क अभियान के तहत शीघ्र निर्माण कार्य शुरू होने हैं। सांसद ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि कोई भी बसाहट इस अभियान से वंचित न रहे और जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्रों में छूटे हुए गाँवों की जानकारी तत्काल दें।

जनजातीय कार्य विभाग: शिक्षा और आदिवासी विकास पर फोकस

जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त श्रीमती निशा मेहरा ने बताया कि जिले के हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परिणामों में सुधार हुआ है। आदि आदर्श ग्राम योजना के तहत 995 कार्यों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनमें से अधिकांश कार्य प्रगति पर हैं। कुछ कार्यों के लिए डीपीआर में संशोधन किया गया है और 20 कार्य अभी प्रारंभ नहीं हुए हैं।

शिक्षा विभाग: छात्रों को बेहतर सुविधाएं

शिक्षा विभाग के जिला अधिकारी श्री आर एस बामनिया ने बैठक में जिले में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सान्दिपनी स्कूल, पीएमश्री विद्यालय और मॉडल स्कूल जैसे संस्थानों को अपार आईडी योजना के तहत डिजिटल रूप से सशक्त किया जा रहा है। इसके अलावा, जिले में अब तक 7290 साइकिलें, 400 लैपटॉप, 100 स्कूटी और पाठ्यपुस्तकें वितरित की जा चुकी हैं। सांसद ने इस अवसर पर सुझाव दिया कि ग्रामीण इलाकों में अंग्रेजी माध्यम के शासकीय विद्यालयों की जानकारी पहुँचाने हेतु अभिभावकों को जागरूक किया जाए, ताकि वे बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर सकें।

लोक शिक्षण में प्रगति और अधोसंरचना विकास

जिला परियोजना समन्वयक (DPC) श्री आर एस सिंगार ने बताया कि 10 छात्रावासों में कुल 650 सीटों की व्यवस्था की गई है, जबकि 6 कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावासों में 1290 सीटें स्वीकृत की गई हैं। साथ ही, जिले में 96 स्कूलों के मरम्मत कार्य और 8 नए अतिरिक्त कक्षों का निर्माण भी प्रगति पर है। बैठक के अंत में सांसद श्रीमती अनीता नागरसिंह चौहान ने सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की प्रमुख समस्याओं और आवश्यकताओं से अवगत कराएं ताकि दिशा समिति की बैठक में उनके समाधान की दिशा में उचित कदम उठाए जा सकें। उन्होंने अधिकारियों से भी कहा कि वे फील्ड स्तर पर आने वाली चुनौतियों से उन्हें अवगत कराएं, जिससे त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

फार्मर रजिस्ट्री में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पटवारियों को सम्मान

एग्रीस्टेक योजना के तहत डिजिटल फार्मर रजिस्ट्री का कार्य जिले में उल्लेखनीय रहा। निर्धारित लक्ष्य 1,50,006 के विरुद्ध अब तक 1,47,222 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो 98.14% की उपलब्धि दर्शाता है। इस सराहनीय कार्य के लिए तीन पटवारियों को सांसद द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इनमें मेघनगर के श्री नटवरसिंह नायक, थांदला के श्री देवेंद्र पंवार और रामा की सुश्री रानी जायसवाल शामिल रहीं। इन अधिकारियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।

बैठक में थांदला विधायक श्री वीरसिंह भूरिया, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जितेन्द्र सिंह चौहान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पी.एल. कुर्वे, संयुक्त कलेक्टर श्री अक्षय सिंह मरकाम समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इस बैठक में जनकल्याण की दिशा में उठाए गए कदमों के मूल्यांकन के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका और विभागीय पारदर्शिता की झलक देखने को मिली। यह स्पष्ट है कि जिले के समुचित विकास हेतु न केवल योजनाओं की सही कार्यान्वयन की आवश्यकता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी और सजग नेतृत्व भी उतना ही आवश्यक है।

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