प्रकृति और नारी शक्ति का जोड़: झाबुआ में शुरू हुआ देश का पहला मातृ समर्पित वृक्षारोपण
झाबुआ। विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में झाबुआ जिले में एक ऐसा आयोजन हुआ जिसने न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल की, बल्कि मातृत्व और महिला सशक्तिकरण को भी अनोखे रूप में सम्मानित किया। ‘वुमन फॉर ट्रीज’ अभियान के तहत चल रहे "एक पेड़ माँ के नाम" कार्यक्रम का आयोजन झाबुआ कलेक्टर कार्यालय परिसर में बड़े हर्षोल्लास से किया गया। इस भावनात्मक और प्रेरणादायक पहल में कलेक्टर सुश्री नेहा मीना और पुलिस अधीक्षक श्री पद्म विलोचन शुक्ल ने स्वयं भाग लिया और अपनी माताओं के सम्मान में पौधारोपण किया। उनके साथ कलेक्टर कार्यालय की महिला अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी इस नेक कार्य में सहभागिता निभाई। यह केवल पौधा लगाने की रस्म नहीं थी, बल्कि यह उस भावना का प्रकटीकरण था, जो एक माँ की ममता और जीवनदायिनी धरती के बीच एक गहरे रिश्ते को जोड़ता है।
'एक पेड़ माँ के नाम' केवल एक पर्यावरणीय पहल नहीं है, बल्कि यह भावनाओं से ओतप्रोत वह मुहिम है, जिसमें हर पेड़ को एक माँ की छवि दी जाती है। जैसे माँ अपने बच्चों को छांव, सुरक्षा और जीवन देती है, वैसे ही एक पेड़ भी समाज को ऑक्सीजन, शीतलता और प्राकृतिक संतुलन देता है। इस अभियान के ज़रिए झाबुआ जिले की महिलाओं ने अपनी माताओं को प्रकृति के इस रूप में याद किया और उन्हें एक सजीव उपहार भेंट किया — एक पौधा जो वर्षों तक उनकी स्मृति में हरा-भरा रहेगा।
अधिकारियों की सहभागिता ने बढ़ाया आयोजन का महत्व
इस अवसर पर जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे और उन्होंने भी व्यक्तिगत रूप से पौधारोपण किया। इनमें शामिल थे: अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पी.एल. कुर्वे, संयुक्त कलेक्टर श्री अक्षय सिंह मरकाम, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री भास्कर गाचले, मुख्य नगरपालिका अधिकारी श्री संजय पाटीदार, तहसीलदार श्री सुनील डावर, तथा कलेक्टर कार्यालय एवं अन्य विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी। सभी ने एक-एक पौधा लगाकर यह वादा किया कि वे न केवल उस पौधे को पालेंगे, बल्कि आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास करते रहेंगे।
महिला कर्मचारियों की भागीदारी बनी अभियान की आत्मा
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत थी इसमें महिला कर्मचारियों की सक्रिय सहभागिता। महिलाएं ना केवल अपनी भावनाओं के ज़रिए इस अभियान से जुड़ीं, बल्कि उन्होंने यह भी दिखाया कि आज की महिला पर्यावरण के संरक्षण में कितनी सजग और संकल्पित है। कई महिला अधिकारियों ने इस अवसर पर अपनी माँ की स्मृति साझा करते हुए यह कहा कि वे अपने द्वारा लगाए गए पौधे को अपनी माँ की तरह देखभाल के साथ बड़ा करेंगी।
‘वुमन फॉर ट्रीज’ : एक वैश्विक सोच की स्थानीय झलक
'वुमन फॉर ट्रीज' एक सामाजिक और पर्यावरणीय पहल है, जो महिलाओं की शक्ति को प्रकृति की सेवा में जोड़ने का प्रयास करती है। इसका उद्देश्य केवल वृक्षारोपण नहीं, बल्कि महिलाओं को पर्यावरण संरक्षण की अग्रणी भूमिका में स्थापित करना है। झाबुआ में इस अभियान की शुरुआत ने स्थानीय प्रशासन के प्रयासों को नई दिशा दी है। झाबुआ, जो कि आदिवासी बहुल क्षेत्र है और जहाँ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, वहां इस तरह के प्रयास एक सकारात्मक परिवर्तन की नींव रख सकते हैं। जिला प्रशासन द्वारा किया गया यह आयोजन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक दीर्घकालीन सोच का प्रतीक है। यह आशा की जा रही है कि इस अभियान के तहत लगाए गए पौधे न केवल जिले को हरियाली देंगे, बल्कि लोगों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाएंगे।
कलेक्टर का प्रेरणादायक संदेश
इस अवसर पर कलेक्टर सुश्री नेहा मीना ने कहा, "एक पेड़ माँ के नाम लगाना केवल एक भावनात्मक कार्य नहीं, बल्कि यह हमारी भावी पीढ़ी के लिए एक प्राकृतिक उपहार है। यह अभियान हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम प्रकृति से कितना कुछ लेते हैं, लेकिन लौटाते क्या हैं? आइए, हम सब मिलकर अपनी धरती माँ के लिए कुछ करें।" पुलिस अधीक्षक श्री पद्म विलोचन शुक्ल ने भी इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि "हर पेड़ एक प्रहरी है, जो निःस्वार्थ रूप से समाज की सेवा करता है। आज जब जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक संकट बन चुका है, ऐसे समय में ये छोटे-छोटे प्रयास बहुत बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।"
आमजन से अपील: एक पेड़, एक प्रण
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने सभी जिलेवासियों से अपील की कि वे भी इस अभियान से जुड़ें और अपने जीवन में कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं — वह भी अपनी माँ, बहन या किसी प्रिय महिला के नाम। यह न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा, बल्कि एक पीढ़ी को भावनात्मक रूप से प्रकृति से जोड़ने का कार्य करेगा।
यादगार बन गया यह दिन
पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान कई महिलाएं भावुक हो गईं। कुछ ने अपने साथ अपनी माँ की तस्वीरें लेकर पौधे लगाए, तो कुछ ने अपने बच्चों को भी इस अभियान में शामिल किया। तस्वीरों में मुस्कराते चेहरे और हाथों में कुदाल लिए पौधे लगाते लोग इस बात का प्रमाण थे कि यह दिन केवल एक रस्म नहीं था, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत था। निष्कर्षतः, झाबुआ जिले में आयोजित ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान न केवल पर्यावरणीय पहल के रूप में बल्कि सामाजिक, भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बना। यह कार्यक्रम दिखाता है कि यदि स्थानीय प्रशासन, समाज और महिलाएं मिलकर कार्य करें तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

