जल संरक्षण की ओर बढ़ते कदम: मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद ने मनाया 'बावड़ी महोत्सव', पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण का लिया संकल्प

झाबुआ फर्स्ट
झाबुआ।  मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक अनूठा और प्रेरणादायक आयोजन किया गया, जिसने सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देते हुए जल स्रोतों के महत्व को रेखांकित किया। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद ने विश्व पर्यावरण और गंगा दशहरा के पावन अवसर पर "जल गंगा संवर्धन अभियान" के तहत थांदला में 300 साल पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी के परिसर में "बावड़ी उत्सव" का आयोजन किया। यह उत्सव न केवल जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने का एक मंच बना, बल्कि सामुदायिक उल्लास और पारंपरिक मूल्यों को भी जीवंत किया। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश के प्राचीन जल स्रोतों को पुनर्जनन देना और उनकी महत्ता को जन-जन तक पहुँचाना है। इस दिशा में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए बावड़ियों, कुओं और तालाबों जैसे परंपरागत जल स्रोतों को सहेजने के लिए जनता को प्रेरित किया। थांदला में आयोजित बावड़ी उत्सव इस अभियान का एक जीवंत उदाहरण बना, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस आयोजन का नेतृत्व जिला प्रशासन और जन अभियान परिषद के संयुक्त प्रयासों से किया गया। 
      कलेक्टर नेहा मीना के निर्देशों के अनुरूप इस उत्सव को जनभागीदारी का रूप दिया गया, ताकि लोग जल संरक्षण को न केवल एक जिम्मेदारी के रूप में देखें, बल्कि इसे उत्सव के माध्यम से अपने जीवन का हिस्सा बनाएँ। इस आयोजन में परंपरागत जल स्रोतों के महत्व को समझाने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें पौधरोपण, भजन-कीर्तन, संगोष्ठी और सामुदायिक चर्चाएँ शामिल थीं। बावड़ी उत्सव की शुरुआत विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक विशेष पौधरोपण कार्यक्रम के साथ हुई। इस अवसर पर "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत बावड़ी के समीप नीम, पीपल और बरगद जैसे पर्यावरण के लिए लाभकारी पौधे लगाए गए। यह पौधरोपण न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक कदम था, बल्कि मातृ-शक्ति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक भी था। पौधरोपण के बाद, गंगा दशहरा के पावन अवसर पर बावड़ी पूजन का आयोजन किया गया। इस पूजन में स्थानीय निवासियों ने बावड़ी की स्वच्छता और संरक्षण का संकल्प लिया। 300 साल पुरानी यह बावड़ी, जो कभी नगर के जल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत थी, समय के साथ उपेक्षा का शिकार हो गई थी। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद की पहल से इस बावड़ी को न केवल साफ किया गया, बल्कि इसे पुनर्जनन देकर उत्सव का केंद्र बनाया गया। 
Jhabua First News- Resolve to save the heritage of our ancestors: 'Bawdi Utsav' celebrated with great pomp in Madhya Pradesh, unique message of water conservation given- जल संरक्षण की ओर बढ़ते कदम: मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद ने मनाया 'बावड़ी महोत्सव', पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण का लिया संकल्प


    बावड़ी उत्सव में भजन-कीर्तन के माध्यम से लोगों ने जल और प्रकृति के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा व्यक्त की। स्थानीय कलाकारों ने जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता पर आधारित भजनों की प्रस्तुति दी, जिसने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। इसके बाद आयोजित संगोष्ठी में जल स्रोतों के संरक्षण और उनके ऐतिहासिक महत्व पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि बावड़ियाँ न केवल जल आपूर्ति का साधन थीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक थीं। इनके संरक्षण से न केवल जल संकट से निपटा जा सकता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी बचाया जा सकता है। इस आयोजन में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के संभाग समन्वयक अमित शाह और जिला समन्वयक प्रेमसिंह चौहान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में परिषद ने प्रदेश भर में 100 से अधिक मृतप्राय बावड़ियों को पुनर्जनन दिया है। थांदला में पहली बार आयोजित इस बावड़ी उत्सव ने स्थानीय निवासियों में एक नई ऊर्जा का संचार किया। नगरवासियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि प्रत्येक वर्ष गंगा दशहरा पर बावड़ी पूजन और उत्सव आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही, बावड़ी की नियमित स्वच्छता और रखरखाव के लिए एक समिति का गठन किया गया, जिसमें स्थानीय युवा, महिलाएँ और बुजुर्ग शामिल हैं। विभिन्न समुदायों और संगठनों के लोग एक मंच पर आए और जल संरक्षण के लिए एकजुट हुए। नवअंकुर समितियों और नगर विकास समिति के सदस्यों ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। नगर विकास समिति के अध्यक्ष अर्जुन सिंह राठौर ने इस अवसर पर कहा कि बावड़ी उत्सव ने न केवल जल संरक्षण की दिशा में एक नई शुरुआत की है, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी काम किया है। कार्यक्रम का समापन मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद की ब्लॉक समन्वयक वर्षा डोडीयार द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों, संगठनों और प्रशासन का धन्यवाद किया, जिनके सहयोग से यह आयोजन संभव हो सका। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के लिए अपने व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों को और मजबूत करने का संकल्प लिया। बावड़ी उत्सव ने यह साबित कर दिया कि परंपरागत जल स्रोतों का संरक्षण केवल एक तकनीकी कार्य नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन भी है। इस आयोजन ने लोगों को यह एहसास दिलाया कि जल संरक्षण केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का कर्तव्य है। थांदला की इस पहल ने अन्य शहरों और गाँवों के लिए भी एक प्रेरणा का काम किया है। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद ने इस अभियान को और व्यापक बनाने की योजना बनाई है।

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