पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल: राणापुर में 'एक पेड़ माँ के नाम' कार्यक्रम में लगाए गए सैकड़ों पौधे

Unique initiative for environmental protection: Hundreds of saplings were planted in the program 'One tree in the name of mother' in Ranapur.
झाबुआ फर्स्ट

Jhabua First News- Unique initiative for environmental protection: Hundreds of saplings were planted in the program 'One tree in the name of mother' in Ranapur- पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल: राणापुर में 'एक पेड़ माँ के नाम' कार्यक्रम में लगाए गए सैकड़ों पौधे


राणापुर। प्रकृति के प्रति समर्पण और मातृत्व की भावना को सम्मान देने के उद्देश्य से "एक पेड़ मां के नाम" अभियान मध्यप्रदेश के कोने-कोने में एक हरित क्रांति की तरह फैल रहा है। इसी क्रम में राणापुर विकासखंड स्थित शासकीय महाविद्यालय परिसर में एक प्रेरणादायक पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन की विशेष बात यह रही कि यह केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से एक भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव की मिसाल पेश की गई। इस विशेष अभियान का संचालन मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के मार्गदर्शन में हुआ और यह कार्यक्रम जिला प्रशासन तथा कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के निर्देशन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल पर्यावरण की रक्षा करना था, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़कर सामूहिक रूप से प्रकृति के साथ रिश्ते को मज़बूत बनाना भी था। आज के कार्यक्रम में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिनमें नीम, पीपल, आम, अशोक और तुलसी शामिल हैं। 

"एक पेड़ मां के नाम" – भावनाओं से जुड़ा एक हरित आंदोलन

इस अभियान का मुख्य लक्ष्य मध्य प्रदेश को हरा-भरा बनाना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना है। सरकार का यह प्रयास है कि प्रत्येक नागरिक अपनी माँ के नाम पर एक पेड़ लगाए और उसकी देखभाल करे। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी बढ़ेगी। जिला समन्वयक प्रेमसिंह चौहान ने इस अवसर पर संबोधित करते हुए कहा— "आज जब दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, ऐसे में यह अभियान हमें न केवल प्रकृति के करीब लाता है, बल्कि हमें यह सिखाता है कि हम अपनी जड़ों से कैसे जुड़ें। मां और वृक्ष – दोनों ही हमें जीवन देते हैं, संरक्षण करते हैं और बिना कुछ मांगे हमारे लिए समर्पित रहते हैं।" उन्होंने आगे बताया कि इस अभियान को अंकुर योजना और वायुदूत एप से जोड़ा गया है। हर व्यक्ति जो पौधा लगाता है, उसकी जानकारी वायुदूत एप पर अपलोड की जाती है, जिससे शासन स्तर पर पौधों की निगरानी और संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

 शासकीय महाविद्यालय परिसर बना हरियाली का प्रतीक

पौधारोपण का यह कार्यक्रम शासकीय महाविद्यालय राणापुर के परिसर में आयोजित किया गया, जहाँ कॉलेज प्रशासन, छात्रसंघ और सामाजिक संस्थाओं ने एकजुट होकर दर्जनों पौधे लगाए। महाविद्यालय के प्राचार्य श्री गोविन्द मुवेल ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा— "हमारे कॉलेज के लिए यह गौरव की बात है कि हम इस अभियान का हिस्सा बनें। विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। ये पौधे केवल हरियाली नहीं देंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को जीवनदायिनी छाया और प्रेरणा भी प्रदान करेंगे।"

 सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी

इस कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि इसमें नवांकुर संस्थाओं, ग्राम स्तरीय स्वयंसेवी संगठन, और मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम (MSW/BSW) के छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी रही। उपस्थित प्रमुख प्रतिनिधियों में  नरेन्द्र सिंह वसुनिया, सरदार वसुनिया, शैलेंद्र नायक, कालुसिंह ढाकिया, महेश अमलियार शामिल रहे.वहीं मेंटर्स के रूप में चेनसिंह अमलियार, रीनू जमरा, और संगीता अजनार ने न केवल पौधारोपण में सहयोग दिया बल्कि छात्रों को जागरूक भी किया।

अंकुर योजना और वायुदूत एप – तकनीक से जुड़ा पर्यावरण अभियान

मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रारंभ की गई अंकुर योजना और वायुदूत मोबाइल एप के माध्यम से पौधारोपण को डिजिटली ट्रैक किया जाता है। जिला समन्वयक ने विद्यार्थियों को एप के इस्तेमाल की पूरी जानकारी दी:

  • पौधा लगाने के तुरंत बाद उसका फोटो एप पर अपलोड करना होता है।
  • समय-समय पर पौधे की स्थिति की जानकारी दी जाती है।
  • एप पर पौधे की वृद्धि की मॉनिटरिंग होती है और बेहतर संरक्षण करने वाले व्यक्तियों को पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं।
  • इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ती है बल्कि पौधारोपण को लेकर लोगों में जिम्मेदारी की भावना भी आती है।

 युवाओं में दिखा उत्साह और प्रकृति के प्रति जुड़ाव

कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों ने न केवल पौधे लगाए बल्कि पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी ली। बीएसडब्ल्यू और एमएसडब्ल्यू के छात्र-छात्राओं ने संकल्प लिया कि वे केवल आज नहीं, आने वाले वर्षों तक भी इन पौधों की देखभाल करेंगे। स्वाति अजनार, एक छात्रा ने कहा— "मैंने जो पौधा लगाया है, वह मेरी मां को समर्पित है। जैसे मेरी मां ने मुझे पाला है, वैसे ही मैं इस पौधे को बड़ा होते देखना चाहती हूं।" ऐसी ही भावनाएं अन्य विद्यार्थियों की भी थीं। हर छात्र-छात्रा इस अभियान को एक व्यक्तिगत मिशन मानकर इससे जुड़ा दिखा।

हरियाली के ज़रिए सामाजिक बदलाव

इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब छात्र, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासन एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तो परिणाम न केवल सकारात्मक होते हैं, बल्कि दीर्घकालिक भी साबित होते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने मिलकर एक ‘हरित परिक्रमा’ की, जिसमें परिसर के चारों ओर लगाए गए पौधों का निरीक्षण करते हुए उनकी देखभाल की योजना पर चर्चा की गई।

एक बीज से शुरू हुआ बदलाव

"एक पेड़ मां के नाम" एक ऐसा अभियान है, जो भावनाओं, सामाजिक चेतना और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को एक साथ पिरोता है। राणापुर का यह कार्यक्रम इस बात का साक्षी है कि जब व्यक्ति दिल से किसी उद्देश्य से जुड़ता है, तो बदलाव निश्चित होता है। यहां रोपे गए पौधे आने वाले वर्षों में न केवल वातावरण को शुद्ध करेंगे, बल्कि यह भी याद दिलाएंगे कि एक छोटे से बीज में बदलाव की कितनी बड़ी शक्ति होती है।

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