झाबुआ में जनसहभागिता से बढ़ रहा जल संरक्षण का प्रभाव, 'जल गंगा संवर्धन अभियान' बना जन आंदोलन

The impact of water conservation is increasing with public participation in Jhabua, 'Jal Ganga Samvardhan Abhiyan' has become a mass movement.
झाबुआ फर्स्ट

कलेक्टर नेहा मीना के निर्देशन में जिले के 375 जल स्रोतों का गहरीकरण, 58 हजार ट्रॉली मिट्टी निकाली गई, 27 लाख घन मीटर से अधिक जल संग्रहण क्षमता विकसित

 झाबुआ। जल संकट से निपटने और भावी पीढ़ियों को सुरक्षित जल उपलब्ध कराने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए 'जल गंगा संवर्धन अभियान' को झाबुआ जिले में विशेष जनसमर्थन प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संकल्पना और कलेक्टर नेहा मीना के नेतृत्व में यह अभियान एक आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें आम नागरिक, किसान, पंचायत प्रतिनिधि और सरकारी अमला एकजुट होकर कार्य कर रहा है।

पुराने जल स्रोतों का पुनर्जीवन और नव निर्माण

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल सरकार नहीं, बल्कि आम जनता की भागीदारी के साथ जल स्रोतों का संरक्षण किया जा रहा है। झाबुआ जिले के 375 ग्राम पंचायतों में 585 से अधिक जल संरचनाएं — जैसे तालाब, स्टॉप डेम, चेक डेम आदि— चिन्हित की गईं, जिनमें से 375 संरचनाओं का गहरीकरण कार्य प्रारंभ किया गया है। इन जल संरचनाओं से अब तक 58,941 ट्रैक्टर-ट्रॉली मिट्टी निकाली जा चुकी है, जो लगभग 2,183 किसानों के खेतों में डाली गई। इससे न केवल जल भराव क्षमता में वृद्धि हुई है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी किसानों के लिए एक बोनस की तरह साबित हुई है। 

 जल स्तर में बढ़ोतरी की उम्मीद

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जितेन्द्र सिंह चौहान के अनुसार, इस अभियान के परिणामस्वरूप जल संरचनाओं की कुल संग्रहण क्षमता 26.25 लाख घन मीटर से बढ़कर 27.72 लाख घन मीटर तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि आगामी वर्षा ऋतु में जल संग्रहण की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे भूजल स्तर में सुधार संभव है।

Jhabua First News- The impact of water conservation is increasing with public participation in Jhabua, 'Jal Ganga Samvardhan Abhiyan' has become a mass movement


 किसानों को लाभ – मिट्टी, पानी और उन्नत फसल

गहरीकरण से प्राप्त मिट्टी किसानों के खेतों में उपयोग की जा रही है, जिससे उनकी भूमि और अधिक उपजाऊ बन रही है। यह मिट्टी न केवल उर्वरता बढ़ा रही है, बल्कि खेतों के समतलीकरण में भी सहायक साबित हो रही है। लगभग 4761 ग्रामीणों ने इस पूरे अभियान में प्रत्यक्ष भागीदारी निभाई है, जो ग्रामीण चेतना के उन्नयन का संकेत है।

 क्षेत्रवार जल संरक्षण की स्थिति

अभियान को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के लिए जिले को छह जनपद क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जहां अलग-अलग स्तर पर जल संरचनाओं के गहरीकरण और सुधार कार्य हो रहे हैं।

 झाबुआ जनपद क्षेत्र

  • 68 ग्राम पंचायतों में 102 जल संरचनाएं चिन्हित
  • 68 संरचनाओं का गहरीकरण कार्य प्रारंभ
  • 13,440 ट्रैक्टर-ट्रॉली मिट्टी निकाली गई
  • 700 ग्रामीणों की भागीदारी

 मेघनगर जनपद क्षेत्र

  • 61 ग्राम पंचायतों में 68 जल संरचनाएं चिन्हित
  • 64 संरचनाओं पर कार्य प्रारंभ
  • 17,100 ट्रैक्टर-ट्रॉली मिट्टी निकाली गई
  • 850 ग्रामीणों ने सहयोग किया

 पेटलावद जनपद क्षेत्र

  • 77 ग्राम पंचायतों में 148 जल संरचनाएं चिन्हित
  • 123 जल संरचनाओं का कार्य प्रारंभ
  • 19,723 ट्रैक्टर-ट्रॉली मिट्टी निकाली गई
  • 1826 ग्रामीणों की भागीदारी

 रामा जनपद क्षेत्र

  • 55 ग्राम पंचायतों में 148 जल संरचनाएं चिन्हित
  • 45 जल संरचनाओं का गहरीकरण कार्य प्रारंभ
  • 2,620 ट्रैक्टर-ट्रॉली मिट्टी निकाली गई
  • 510 ग्रामीण शामिल

 रानापुर जनपद क्षेत्र

  • 47 ग्राम पंचायतों में 56 जल संरचनाएं चिन्हित
  • 47 पर कार्य प्रारंभ
  • 1,482 ट्रैक्टर-ट्रॉली मिट्टी निकाली गई
  • 225 ग्रामीणों की सहभागिता

 थांदला जनपद क्षेत्र

  • 67 ग्राम पंचायतों में 89 जल संरचनाएं चिन्हित
  • 67 पर कार्य शुरू
  • 4,576 ट्रैक्टर-ट्रॉली मिट्टी निकाली गई
  • 650 ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी

 रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग की ओर भी कदम

केवल तालाबों और कुओं का ही नहीं, बल्कि अब रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग की दिशा में भी जिला प्रशासन गंभीरता से कार्य कर रहा है। कई शासकीय कार्यालयों, स्कूलों और निजी भवनों में वर्षा जल संग्रहण की संरचनाएं बनाई जा रही हैं ताकि वर्षा जल सीधे भूगर्भ में समाहित हो सके। यह संपूर्ण अभियान इस बात का उदाहरण है कि जब सरकार और जनता मिलकर किसी कार्य को करें, तो उसका प्रभाव कितना गहरा और स्थायी होता है। किसानों का कहना है कि इस अभियान से न केवल उन्हें सिंचाई के लिए पानी मिलेगा, बल्कि मिट्टी के कारण उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी।

 मुख्य बातें संक्षेप में:

  1. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर झाबुआ में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' को जन आंदोलन का रूप 375 से अधिक जल संरचनाओं का गहरीकरण,
  2.  किसानों को मुफ्त उपजाऊ मिट्टी उपलब्ध 
  3.  2183 किसानों के खेतों में डाली गई 58,941 ट्रॉली मिट्टी 
  4.  जल संग्रहण क्षमता 26.25 लाख से बढ़कर 27.72 लाख घन मीटर 
  5.  4761 ग्रामीणों ने की सीधी भागीदारी 
  6.  झाबुआ, मेघनगर, पेटलावद, रामा, रानापुर और थांदला क्षेत्र में ज़ोरशोर से चल रहा अभियान 
  7.  रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग और अमृत सरोवर निर्माण पर भी विशेष ज़ोर
  8. 4,700+ ग्रामीणों की सीधी सहभागिता
  9. झाबुआ जिले में 375 जल संरचनाओं का गहरीकरण
  10. हजारों किसानों को खेतों के लिए उर्वर मिट्टी

झाबुआ जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि आगामी मानसून तक जिले के सभी चिन्हित जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण किया जाए और नए अमृत सरोवरों का भी निर्माण किया जाए। यदि इसी गति और जनभागीदारी के साथ अभियान जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में झाबुआ जल संकट से मुक्त जिला बन सकता है। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' झाबुआ जिले में एक मिसाल बन चुका है। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभावना और ग्रामीण चेतना का प्रतीक है। यह दिखाता है कि बदलाव तब आता है जब लोग उसके लिए आगे बढ़ते हैं।

न्यूज़ एडिटर

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झाबुआ फर्स्ट मध्यप्रदेश में स्थापित अग्रणी हिंदी वेब न्यूज़ , वर्ष 2022 में आरएनआई दिल्ली द्वारा साप्ताहिक समाचार पत्र के रूप में पंजीयन के बाद खबरों को ऑनलाइन और प्रिंट दोनों ही माध्यम से प्रकाशित किया जा रहा है।
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