थांदला में सोशल ऑडिट कार्यक्रम: प्रधानमंत्री आवास योजना ने बदली सैकड़ों परिवारों की जिंदगी

Social Audit Program in Thandla: Pradhan Mantri Awas Yojana changed the lives of hundreds of families.
झाबुआ फर्स्ट

थांदला में दो दिवसीय सामाजिक ऑडिट कार्यक्रम: योजनाओं की जमीनी सच्चाई से रूबरू हुई मैनिट की टीम, उजागर हुईं बदलाव की प्रेरक कहानियाँ

थांदला। नगर पालिका परिषद थांदला में हाल ही में एक विशेष और बेहद महत्वपूर्ण दो दिवसीय सामाजिक ऑडिट (#SocialAudit) कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने न केवल सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति को सामने लाया, बल्कि लाभार्थियों की जीवन-यात्रा को भी बेहद करीब से समझा। यह कार्यक्रम स्वतंत्र सुविधा एजेंसी (Independent Facilitation Agency - IFA), मैनिट भोपाल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह जानना था कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) जैसी योजनाएं लाभार्थियों के जीवन में किस प्रकार से सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। इसके तहत न केवल योजना के क्रियान्वयन की जांच की गई, बल्कि उन लोगों से संवाद भी किया गया जो प्रत्यक्ष रूप से इन योजनाओं के लाभार्थी रहे हैं।

जमीनी स्तर पर उतरी मैनिट भोपाल की टीम

मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल से आए प्रोफेसर डॉ. के.के. धोटे की अगुआई में सामाजिक ऑडिट टीम ने दो दिनों तक थांदला नगर क्षेत्र में गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उनकी टीम में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, मध्यप्रदेश से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से डॉ. बसंत राव जरेलिया (एसएलटीसी), मनीष शर्मा (सोशल एक्सपर्ट) और कुणाल विश्वकर्मा (आईईसी एक्सपर्ट) शामिल थे। टीम ने योजनाओं के दस्तावेजी विश्लेषण के साथ-साथ फील्ड विज़िट भी किए, जहाँ वे सीधे लाभार्थियों से मिले और उनकी कहानियाँ सुनीं। ऑडिट टीम ने थांदला के विभिन्न वार्डों में जाकर बीएलसी (बेनिफिशरी-लीड कंस्ट्रक्शन) योजना के अंतर्गत निर्मित घरों का निरीक्षण किया। इन घरों में रहने वाले परिवारों से संवाद कर उन्होंने यह जाना कि इन आवासों के निर्माण ने उनके जीवन को कैसे सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया।

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एक कहानी, जो रह गई दिल में बस कर

एक वार्ड में टीम की मुलाकात हुई सीता बाई नामक महिला से, जो वर्षों से किराए के छोटे से कमरे में अपने परिवार के साथ रहती थीं। योजना से उन्हें मिली सहायता से उन्होंने अपना खुद का पक्का घर बनाया। सीता बाई ने बताया—“पहले बरसात में टपकती छत के नीचे बच्चों के साथ सोना पड़ता था। अब मेरा खुद का घर है, जिसमें सुरक्षा है, स्वाभिमान है और स्थिरता है। प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद कि उन्होंने गरीब के जीवन में रोशनी भर दी।” ऐसी ही कई प्रेरक कहानियाँ टीम को सुनने को मिलीं—कहीं महिलाएं पहली बार अपने घर की मालकिन बनीं, तो कहीं दिव्यांगजनों को मिला आत्मसम्मान। 

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी

इस आयोजन में नगर पालिका परिषद थांदला के अध्यक्ष, नगर के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO), वार्ड पार्षदगण, नगर इंजीनियर, यूएलबी (शहरी स्थानीय निकाय) के अन्य अधिकारी, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, और बड़ी संख्या में योजना के लाभार्थी भी उपस्थित रहे। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस पहल को पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक सराहनीय कदम बताया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि आने वाले समय में इस तरह के ऑडिट को नियमित किया जाएगा, ताकि योजनाओं का लाभ असल जरूरतमंदों तक पहुंच सके।

महिलाओं की सक्रिय भूमिका बनी प्रेरणा

कार्यक्रम में एक खास बात यह देखने को मिली कि स्व-सहायता समूहों (Self-Help Groups) से जुड़ी महिलाएं न केवल योजना की जागरूकता में अग्रणी रहीं, बल्कि उन्होंने योजना क्रियान्वयन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। कई महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए कि कैसे आवास योजना ने उन्हें एक नई पहचान दी और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया।

कमला बाई की कहानी: खुद निर्माण कर बनाया घर

कमला बाई, जो एक स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं, ने बताया कि उन्होंने अपने घर का निर्माण खुद की निगरानी में किया। उन्होंने कहा— “मैंने ठेकेदार पर निर्भर नहीं होकर खुद ईंट-पत्थर का हिसाब रखा। यह घर मेरा सपना था और इसे मैंने अपने हाथों से पूरा किया।” इस प्रकार की सक्रिय सहभागिता ने योजना को केवल कागज़ी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बना दिया है। सुनीता देवी, जिन्हें हाल ही में अपना घर मिला है, ने बताया, "मेरे पति एक छोटी दुकान चलाते हैं। हम कभी सोच भी नहीं सकते थे कि अपना घर होगा। आज हमारे पास न केवल एक सुरक्षित आशियाना है, बल्कि इससे हमारे बच्चों के भविष्य को नई दिशा मिली है।" एक अन्य लाभार्थी रामसिंह ने बताया कि कैसे उनका नया घर उनके परिवार के स्वास्थ्य में सुधार का कारण बना, "पहले हम झुग्गी में रहते थे जहाँ साफ-सफाई की समस्या थी। अब हमारे पास शौचालय और स्वच्छ पानी की व्यवस्था है जिससे बीमारियाँ कम हुई हैं।"

तकनीकी विश्लेषण और रिपोर्टिंग

प्रो. के.के. धोटे और उनकी टीम ने तकनीकी पक्षों की भी गंभीरता से जांच की—जैसे भवन निर्माण की गुणवत्ता, योजना की समय-सीमा, फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया, और जमीनी दस्तावेजों का मिलान। साथ ही, टीम ने विजुअल डॉक्यूमेंटेशन, फोटो ग्राफ्स, और वीडियो क्लिप्स के माध्यम से रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया भी साझा की, जिससे भविष्य में निगरानी अधिक पारदर्शी और प्रभावी हो सके।

आईईसी गतिविधियों पर भी रहा फोकस

कार्यक्रम के दौरान आईईसी (Information, Education & Communication) गतिविधियों का भी आयोजन किया गया, जिसमें जनसामान्य को योजना की जानकारी दी गई, उनके प्रश्नों का उत्तर दिया गया और जागरूकता फैलाने के लिए पोस्टर-बैनर, स्लोगन और नुक्कड़ नाटक जैसे माध्यमों का प्रयोग किया गया। इन गतिविधियों ने यह सुनिश्चित किया कि नागरिक केवल योजना के लाभार्थी न बनें, बल्कि उसके सक्रिय सहभागी भी बनें। मैनिट की टीम ने यह स्पष्ट किया कि सामाजिक ऑडिट का उद्देश्य किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि योजनाओं की गहन समीक्षा कर उन्हें और अधिक प्रभावी बनाना है। कार्यक्रम के अंत में तैयार की गई प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ सुझाव भी शामिल किए गए, जैसे:

  • योजना की समयसीमा को लेकर अधिक अनुशासन।
  • तकनीकी मार्गदर्शन का विस्तार।
  • महिलाओं और दिव्यांगजनों को प्राथमिकता।

थांदला में आयोजित यह सामाजिक ऑडिट कार्यक्रम एक आदर्श मॉडल बनकर सामने आया है, जिसमें सिर्फ योजना की समीक्षा नहीं, बल्कि उससे जुड़ी मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता दी गई। यह कार्यक्रम यह दर्शाता है कि यदि योजनाओं को सही दिशा, तकनीकी निगरानी, और सामाजिक सहभागिता के साथ क्रियान्वित किया जाए, तो वे केवल ईंट-पत्थर के निर्माण तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे सपनों को साकार करती हैं। नगर पालिका परिषद थांदला और मैनिट भोपाल की यह संयुक्त पहल न केवल स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही को मजबूत करती है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करती है कि विकास सिर्फ आंकड़ों में नहीं, कहानियों में दिखता है—उन कहानियों में जहाँ किसी की छत अब टपकती नहीं, किसी माँ का आत्मविश्वास अब झुकता नहीं, और किसी बच्ची की पढ़ाई अब रोशनी के बिना नहीं रुकती।

न्यूज़ एडिटर

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