झाबुआ में नशामुक्त भारत अभियान को मिली नई रफ्तार: ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए शुरू हुई सशक्त पहल

Drug-free India campaign gains new momentum in Jhabua: A strong initiative has been started to make the villagers aware.
झाबुआ फर्स्ट

Jhabua First News- Drug-free India campaign gains new momentum in Jhabua: A strong initiative has been started to make the villagers aware- झाबुआ में नशामुक्त भारत अभियान को मिली नई रफ्तार: ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए शुरू हुई सशक्त पहल


झाबुआ। देश भर में 'अंतर्राष्ट्रीय नशा निवारण दिवस' (26 जून) की तैयारियों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम जोरों पर हैं, और मध्यप्रदेश का आदिवासी बहुल जिला झाबुआ भी इस दिशा में एक प्रेरणास्पद उदाहरण बनकर उभर रहा है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा ‘नशामुक्त भारत अभियान’ के तहत 1 जून से 26 जून तक जिलेभर में व्यापक जागरूकता गतिविधियों की श्रृंखला चलाई जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ नशे के खिलाफ जानकारी देना नहीं है, बल्कि इसे सामाजिक आंदोलन का रूप देकर हर वर्ग तक पहुंचाना है—चाहे वह ग्राम पंचायत का प्रतिनिधि हो या गाँव का हर आम नागरिक। इस अभियान को झाबुआ की जिलाधिकारी श्रीमती नेहा मीना के नेतृत्व में नई दिशा मिली है। उनके निर्देश पर सामाजिक न्याय विभाग के उप संचालक श्री पंकज सांवले के मार्गदर्शन में जिले के हर कोने में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नशे की समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है, जिसमें सामुदायिक सहभागिता को प्राथमिकता दी गई है। 

ग्राम पंचायतें बनीं बदलाव की आधारशिला

इस व्यापक जागरूकता मुहिम की शुरुआत जनपद पंचायत पेटलावद के सभागार से हुई, जहां जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों से आए सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक एकत्र हुए। इस आयोजन का उद्देश्य था – स्थानीय नेतृत्व को नशामुक्ति अभियान का सक्रिय भागीदार बनाना। कार्यक्रम के दौरान विभागीय अधिकारियों ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों को नशे के दुष्परिणामों, इसके सामाजिक व स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों तथा इससे जुड़ी कानूनी जानकारी से अवगत कराया। इसके साथ ही उन्हें इस मुहिम को गांवों में जन आंदोलन की तरह ले जाने के लिए प्रेरित किया गया।

शपथ के साथ अभियान का संकल्प

कार्यक्रम की सबसे प्रभावशाली झलक तब देखने को मिली जब सभागार में मौजूद सभी प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर नशा न करने और नशे के विरुद्ध समाज में जागरूकता फैलाने की शपथ ली। यह क्षण केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि झाबुआ की माटी से उभर रही एक नई सोच की शुरुआत थी। शपथ में सभी ने यह संकल्प लिया कि वे अपने-अपने गांवों में जाकर न केवल खुद नशे से दूर रहेंगे, बल्कि अन्य लोगों को भी नशे से मुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित करेंगे। यह विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि जब नेतृत्व स्तर पर ऐसी प्रतिबद्धता हो, तो समाज में सकारात्मक बदलाव अवश्य आता है।

जागरूकता कार्यक्रमों की बहुआयामी रणनीति

इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुआयामी रणनीति है। केवल सभागारों तक सीमित न रहकर यह मुहिम गांव-गांव, घर-घर तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। विभिन्न माध्यमों जैसे:

  • नुक्कड़ नाटक और लोकनृत्य: ग्रामीणों की पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का उपयोग कर नशे के दुष्प्रभावों को प्रभावी ढंग से दर्शाया जा रहा है।
  • रैली और पदयात्रा: स्कूली बच्चों और युवा स्वयंसेवकों के माध्यम से गांवों में रैलियां निकाली जा रही हैं, जिनमें "नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो" जैसे नारों से वातावरण गूंज उठता है।
  • वॉल पेंटिंग और पोस्टर अभियान: पंचायत भवन, स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों की दीवारों पर रंग-बिरंगे चित्रों और संदेशों के माध्यम से नशे के खिलाफ संदेश दिया जा रहा है।
  • काउंसलिंग सत्र: जो लोग पहले से किसी नशे की गिरफ्त में हैं, उनके लिए परामर्श सत्र और स्वास्थ्य जांच शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।

महिलाओं और युवाओं को बनाया गया अभियान का मुख्य स्तंभ

नशा मुक्ति की दिशा में महिलाओं और युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी गई है। महिला स्व-सहायता समूहों को इस अभियान में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे न केवल अपने परिवारों को नशा मुक्त बना सकें बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी जागरूक कर सकें। इसी तरह स्कूली बच्चों और कॉलेज विद्यार्थियों को अभियान के 'नशा मुक्त ब्रांड एम्बेसडर' के रूप में तैयार किया गया है। युवा वर्ग के लिए विशेष वर्कशॉप आयोजित कर उन्हें यह समझाया जा रहा है कि नशा केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि उनके भविष्य का भी विनाश कर सकता है। जिले के प्रशासनिक अमले ने भी इस अभियान को गंभीरता से लेते हुए, शराब और अन्य नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने की कार्रवाई शुरू की है। नियमित छापेमारी, दुकानों की निगरानी और स्थानीय थानों के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि गांव-गांव में चल रहे अभियान की साख बनी रहे।

नशामुक्ति सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, सामाजिक बदलाव की चिंगारी

झाबुआ जिले में चल रहा यह अभियान केवल एक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव की एक चिंगारी बन चुका है। यह अभियान यह स्पष्ट संदेश देता है कि यदि सही दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाए जाएं और समाज के सभी वर्गों को उसमें शामिल किया जाए, तो किसी भी बड़ी सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

आने वाले सप्ताहों में क्या होगा खास?

1 से 26 जून तक चलने वाले इस अभियान में आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा:

  1. स्कूलों में ड्राइंग प्रतियोगिता – जिसमें बच्चे ‘नशामुक्त भारत’ की कल्पना को रंगों के माध्यम से व्यक्त करेंगे।
  2. आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर संपर्क – विशेषकर आदिवासी बस्तियों में।
  3. स्वास्थ्य शिविर – जिसमें नशे से पीड़ित लोगों का चिकित्सकीय उपचार एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया जाएगा।
  4. ग्राम सभाओं में चर्चा – पंचायत स्तर पर खुली चर्चाएं, जहां ग्रामीण नशे की समस्या पर विचार साझा करेंगे और समाधान सुझाएंगे।

 झाबुआ बन रहा है आदर्श जिला

झाबुआ में चल रही यह पहल संपूर्ण मध्यप्रदेश के लिए एक उदाहरण बन सकती है। यहां प्रशासन, समाज, जनप्रतिनिधि और नागरिक सभी मिलकर एक ऐसे समाज की नींव रख रहे हैं, जहां स्वास्थ्य, शांति और प्रगति को नशे जैसे अभिशाप से मुक्त रखा जा सके। नशामुक्त भारत के सपने को साकार करने के लिए यह जरूरी है कि ऐसी स्थानीय पहलें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर न केवल सराही जाएं बल्कि अन्य जिलों में भी दोहराई जाएं।

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