झाबुआ। जिले के ग्राम पिटोल छोटी में स्थित प्राचीन जैन मंदिर में हुई चोरी की घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी मचा दी थी। यह घटना 10-11 अप्रैल 2025 की मध्यरात्रि को घटित हुई, जब अज्ञात चोरों ने मंदिर का ताला तोड़कर पवित्र मूर्तियों और अन्य कीमती सामानों पर हाथ साफ कर दिया। इस साहसिक चोरी की सूचना मिलते ही झाबुआ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले का खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के पर्दाफाश में पुलिस की तत्परता और सूझबूझ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
घटना का विवरण
पिटोल छोटी के जैन मंदिर में रात के अंधेरे में चोरों ने धावा बोला। चोरों ने मंदिर का नकुचा और ताला तोड़कर प्रवेश किया और वहां रखी मूलनायक भगवान नागेश्वर पार्श्वनाथ की पाषाण प्रतिमा, दो पीतल की छोटी प्रतिमाएँ, एक पीतल की आरती, एक थाल, भगवान के कृत्रिम आभूषण, छह कृत्रिम छत्र और दो दानपेटियों को निशाना बनाया। दानपेटियों में रखे लगभग 10,000 रुपये गायब थे, हालांकि चोरों को नकदी नहीं मिली। मंदिर के पुजारी और स्थानीय निवासी जय भण्डारी, पिता मनोहर लाल भण्डारी, ने इस घटना की शिकायत झाबुआ कोतवाली थाने में दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 266/2025, धारा 305 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया और तुरंत जांच शुरू की गई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
चोरी की इस सनसनीखेज घटना की सूचना मिलते ही झाबुआ पुलिस अधीक्षक श्री पद्मविलोचन शुक्ल ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रेमलाल कुर्वे और श्रीमती रुपरेखा यादव के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम का नेतृत्व थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक रमेशचंद्र भास्करे ने किया। पुलिस अधीक्षक ने टीम को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस मामले का जल्द से जल्द खुलासा किया जाए, ताकि मंदिर की पवित्रता और स्थानीय लोगों के विश्वास को ठेस न पहुंचे। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और कई महत्वपूर्ण सुरागों पर काम किया। स्थानीय लोगों से पूछताछ, आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच और अन्य तकनीकी संसाधनों का उपयोग करते हुए पुलिस ने चोरों तक पहुंचने का रास्ता तैयार किया। जांच के दौरान पुलिस को कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर शक हुआ, जिसके आधार पर उन्होंने अपनी रणनीति बनाई।
आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस की सघन जांच और कड़ी मेहनत का नतीजा जल्द ही सामने आया। थाना कोतवाली और चौकी पिटोल की संयुक्त टीम ने अपराध क्रमांक 266/2025 के तहत दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दिनेश, पिता बदिया डामोर, निवासी ग्राम कयडावद बड़ी, थाना कोतवाली, झाबुआ और कालु, पिता पारू भुरिया, निवासी ग्राम काचला, थाना कल्याणपुरा के रूप में हुई। दोनों आरोपियों से पूछताछ में चोरी की पूरी कहानी सामने आई। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी गया कुछ सामान भी बरामद किया, जिसमें दो हार, एक लोहे की टामी (जो चोरी के दौरान ताला तोड़ने के लिए इस्तेमाल की गई थी), और दानपेटी से चुराए गए 10,000 रुपये में से 520 रुपये नकद शामिल हैं। बरामद सामान को मंदिर प्रशासन के हवाले करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि उन्होंने इस चोरी की योजना कई दिनों पहले बनाई थी। मंदिर की रेकी करने के बाद उन्होंने रात के समय को चुना, जब मंदिर में कोई मौजूद नहीं होता था। लोहे की टामी का उपयोग करके उन्होंने मंदिर का ताला तोड़ा और अंदर रखे कीमती सामानों को चुरा लिया। हालांकि, दानपेटियों में नकदी न मिलने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। चुराए गए सामान को वे आसपास के क्षेत्रों में बेचने की फिराक में थे, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने उनकी योजना को नाकाम कर दिया।
पुलिस की सराहनीय भूमिका
इस मामले के खुलासे में झाबुआ पुलिस की भूमिका अत्यंत प्रशंसनीय रही। पुलिस अधीक्षक श्री पद्मविलोचन शुक्ल के नेतृत्व में गठित टीम ने दिन-रात मेहनत करके इस सनसनीखेज चोरी का पर्दाफाश किया। थाना प्रभारी निरीक्षक रमेशचंद्र भास्करे, उपनिरीक्षक अशोक बघेल, सहायक उपनिरीक्षक उमेश मकवाना, ओमप्रकाश जोशी, राजेश गुर्जर, प्रधान आरक्षक दिलीप डावर, आरक्षक गणेश, अजीत, कैलाश, मुकेश और गोपाल ने इस जांच में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। उनकी लगन और समर्पण ने न केवल चोरों को पकड़ा, बल्कि मंदिर की पवित्रता को भी बहाल करने में मदद की। इस घटना ने पिटोल छोटी और आसपास के क्षेत्रों में हड़कंप मचा दिया था। जैन मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र भी है। चोरी की खबर से लोग आहत थे, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी से समुदाय में राहत की लहर दौड़ गई। मंदिर प्रशासन ने पुलिस की इस उपलब्धि की सराहना की और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्णय लिया।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले की जांच अभी भी जारी है, क्योंकि पुलिस को शक है कि इस चोरी में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, बरामद सामान की पहचान और मूल्यांकन की प्रक्रिया भी चल रही है। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
