झाबुआ। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में हाल ही में वक्फ संशोधन कानून 2025 के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस हिंसा में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, सैकड़ों लोग विस्थापित हुए हैं, और कई परिवार अपने घरों को छोड़कर पड़ोसी जिलों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं। इस घटना ने न केवल पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि देश भर में हिंदू समाज के बीच आक्रोश को भी जन्म दिया है। इसी कड़ी में झाबुआ जिले में सकल हिंदू समाज ने एक विशाल आक्रोश रैली निकाली, जिसमें राष्ट्रपति शासन लागू करने और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जांच कराने की मांग की गई। रैली के दौरान विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता आज़ाद प्रेम सिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी और केंद्र सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील की।
मुर्शिदाबाद हिंसा: क्या हुआ?
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में 10-12 अप्रैल, 2025 के बीच वक्फ संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुए। ये प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए, जिसमें तोड़फोड़, आगजनी, और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। खबरों के अनुसार, इस हिंसा में तीन लोगों की मौत हुई, जिनमें एक नाबालिग छात्र एजाज़ अहमद (17), हरगोविंद दास (65), और चंदन दास (35) शामिल हैं। हिंसा के दौरान कई घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया, और विशेष रूप से हिंदू समुदाय के लोगों को टारगेट करने की खबरें सामने आईं। शमशेरगंज के जाफराबाद में एक पिता-पुत्र की उनके घर में कथित तौर पर हत्या कर दी गई, जबकि एक अन्य युवक गोली लगने से घायल होकर मृत्यु को प्राप्त हुआ। खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस हिंसा में बांग्लादेशी कट्टरपंथी संगठनों, जैसे जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT), का हाथ था, जिन्हें स्थानीय राजनीतिक नेताओं का समर्थन प्राप्त था। इस खुलासे ने मामले को और गंभीर बना दिया है। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), बीएसएफ, और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की, साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं। बावजूद इसके, हिंसा के बाद सैकड़ों परिवार मालदा और झारखंड की ओर पलायन कर गए।
झाबुआ में सकल हिंदू समाज की आक्रोश रैली
मुर्शिदाबाद हिंसा के विरोध में मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में सकल हिंदू समाज ने एक विशाल रैली का आयोजन किया। यह रैली हिंदू समाज के खिलाफ हो रही हिंसा के प्रति आक्रोश व्यक्त करने और पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की विफलता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए निकाली गई। रैली में हजारों लोग शामिल हुए, जिनमें स्थानीय नागरिक, हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता, और विभिन्न सामाजिक समूहों के प्रतिनिधि मौजूद थे। रैली का मुख्य उद्देश्य पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने और हिंसा की निष्पक्ष जांच के लिए NIA को जिम्मेदारी सौंपने की मांग करना था। रैली के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने मुर्शिदाबाद हिंसा को "हिंदू समाज के खिलाफ सुनियोजित हमला" करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की नीति के तहत हिंसा को रोकने में नाकाम रही है। रैली में शामिल लोगों ने नारे लगाए, जैसे "हिंदू समाज पर अत्याचार बंद करो" और "पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करो"। रैली के समापन पर, प्रदर्शनकारियों ने झाबुआ के कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति महोदया को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में क्या कहा गया?
सकल हिंदू समाज द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में मुर्शिदाबाद हिंसा की निंदा करते हुए कई प्रमुख मांगें रखी गईं। ज्ञापन में कहा गया कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है, और राज्य सरकार हिंसा को नियंत्रित करने में असमर्थ रही है। ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें शामिल थीं:
- राष्ट्रपति शासन की मांग: पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए, ताकि निष्पक्ष और पारदर्श जैसे हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।
- NIA जांच: हिंसा में बांग्लादेशी कट्टरपंथियों की संलिप्तता के दावों को देखते हुए, मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी जाए, ताकि इस साजिश के पीछे की सच्चाई सामने आ सके।
- विस्थापितों की घर वापसी: हिंसा के कारण विस्थापित हुए परिवारों को सुरक्षित उनके घरों में वापस लाया जाए और उनकी संपत्ति की रक्षा की जाए।
- कठोर कार्रवाई: हिंसा में शामिल उपद्रवियों और उनके समर्थकों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
विश्व हिंदू परिषद के आज़ाद प्रेम सिंह का बयान
रैली के दौरान, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता आज़ाद प्रेम सिंह ने एक भावनात्मक और जोशीला भाषण दिया। उन्होंने कहा, "मुर्शिदाबाद में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार असहनीय हैं। यह हिंसा केवल वक्फ कानून के विरोध का परिणाम नहीं है, बल्कि हिंदू समाज को निशाना बनाने की सुनियोजित साजिश है।" उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया जाए और पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए। आज़ाद प्रेम सिंह ने यह भी कहा, "पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नीतियों ने राज्य को अराजकता की ओर धकेल दिया है। हिंदुओं को उनके ही घरों में असुरक्षित महसूस करना पड़ रहा है। यह समय है कि केंद्र सरकार संवैधानिक प्रावधानों का उपयोग कर बंगाल में कानून-व्यवस्था को बहाल करे।" उन्होंने सकल हिंदू समाज से एकजुट रहने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने का आह्वान किया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
मुर्शिदाबाद हिंसा और झाबुआ की रैली ने देश भर में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं, जैसे सुवेंदु अधिकारी और दिलीप घोष, ने इस हिंसा को "हिंदुओं के खिलाफ राज्य प्रायोजित हमला" करार दिया है। उन्होंने ममता बनर्जी पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का आरोप लगाया और राष्ट्रपति शासन की मांग को दोहराया। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे "BJP की साजिश" बताया, जिसका उद्देश्य पश्चिम बंगाल में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी हिंसा को गंभीरता से लिया है और जांच के लिए टीमें गठित की हैं। सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाई कोर्ट में इस मामले को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें NIA जांच और राष्ट्रपति शासन की मांग की गई है।

