जल गंगा संवर्धन अभियान: हुडा हाई स्कूल की छात्राओं ने रंगोली के माध्यम से जल संरक्षण का दिया संदेश

Jal Ganga Conservation Campaign: Students of Huda High School gave the message of water conservation through Rangoli.
झाबुआ फर्स्ट

झाबुआ, 19 अप्रैल 2025: जल, जो जीवन का आधार है, आज विश्व भर में एक गंभीर संकट का विषय बन चुका है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण, और जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया जल गंगा संवर्धन अभियान एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अभियान के अंतर्गत झाबुआ जिले के हुडा हाई स्कूल की छात्राओं ने रंगोली के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का अनूठा प्रयास किया। यह कार्यक्रम न केवल जागरूकता फैलाने में सफल रहा, बल्कि युवा पीढ़ी की भागीदारी को भी रेखांकित करता है।

जल गंगा संवर्धन अभियान

जल गंगा संवर्धन अभियान मध्य प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण, जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, और भूजल स्तर को बढ़ाना है। यह अभियान जनभागीदारी पर आधारित है, जिसमें सरकारी अधिकारी, जनप्रतिनिधि, ग्रामवासी, और विशेष रूप से युवा वर्ग सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। अभियान के तहत तालाबों और कुओं का गहरीकरण, नालों का विस्तारीकरण, चेकडैम निर्माण, और वर्षा जल संचयन जैसी गतिविधियां शामिल हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है, "जल की हर बूंद में जीवन का सार है। इसे सहेजने से ही जल संकट दूर होगा।" झाबुआ जिला, जो अपनी आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, जल संकट से भी जूझ रहा है। यहां भूजल स्तर में कमी और वर्षा पर निर्भरता के कारण जल संरक्षण की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में हुडा हाई स्कूल की छात्राओं का यह प्रयास न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि सामुदायिक जागरूकता के लिए एक मिसाल भी है।

Jhabua First- Jal Ganga Conservation Campaign: Students of Huda High School gave the message of water conservation through Rangoliजल गंगा संवर्धन अभियान: हुडा हाई स्कूल की छात्राओं ने रंगोली के माध्यम से जल संरक्षण का दिया संदेश


हुडा हाई स्कूल की छात्राओं का अनूठा प्रयास

19 अप्रैल 2025 को हुडा हाई स्कूल में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में स्कूल की छात्राओं ने रंगोली के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दिया। रंगोली, जो भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है, न केवल कला का माध्यम है, बल्कि भावनाओं और संदेशों को व्यक्त करने का एक शक्तिशाली जरिया भी है। छात्राओं ने अपनी रंगोलियों में जल की बूंद, नदियां, तालाब, और पेड़-पौधों के चित्र बनाकर जल संरक्षण के महत्व को दर्शाया। कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल की प्राचार्या के उद्बोधन से हुई। उन्होंने कहा, "हमारी छात्राएं न केवल पढ़ाई में उत्कृष्ट हैं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी जिम्मेदारी समझती हैं। जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर उनकी यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणा है।" इसके बाद, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि और जल गंगा संवर्धन अभियान के जिला समन्वयक श्री रमेश परमार ने भी छात्राओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस तरह के रचनात्मक प्रयास नई पीढ़ी को जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाते हैं।

रंगोली: संदेश का रंगीन माध्यम

छात्राओं ने स्कूल के प्रांगण में विभिन्न थीम पर आधारित रंगोलियां बनाईं। कुछ रंगोलियों में "जल है तो कल है" और "बूंद-बूंद बचाओ, जीवन बढ़ाओ" जैसे नारे शामिल थे। एक रंगोली में गंगा नदी को दर्शाया गया, जिसमें स्वच्छ जल और प्रदूषित जल का तुलनात्मक चित्रण था। इस रंगोली ने दर्शकों को नदियों के संरक्षण और प्रदूषण रोकने की आवश्यकता पर सोचने के लिए मजबूर किया। कक्षा 10 की छात्रा राधिका ने अपनी रंगोली के बारे में बताया, "हमने अपनी रंगोली में दिखाया है कि कैसे वर्षा जल संचयन से भूजल स्तर बढ़ सकता है। अगर हम बारिश के पानी को बर्बाद होने से बचाएं, तो हमारे कुएं और तालाब हमेशा भरे रहेंगे।" इसी तरह, कक्षा 9 की प्रियंका ने कहा, "रंगोली बनाते समय हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देखें।"  कार्यक्रम में स्थानीय समुदाय के लोग, शिक्षक, और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे। रंगोलियों को देखने के बाद कई लोगों ने छात्राओं के साथ चर्चा की और जल संरक्षण के लिए अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास करने का संकल्प लिया।

जल संरक्षण की आवश्यकता

पृथ्वी का लगभग 70% हिस्सा पानी से ढका हुआ है, लेकिन इसमें से केवल 1% पानी ही पीने योग्य है। भारत जैसे विकासशील देश में, जहां जनसंख्या अधिक है और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है, जल संरक्षण एक अनिवार्य आवश्यकता है। भारत में जल शक्ति मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक पानी की मांग 1,093 बिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुंच सकती है, जबकि उपलब्धता केवल 1,121 बिलियन क्यूबिक मीटर है। मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों, विशेष रूप से झाबुआ जैसे आदिवासी जिलों में, भूजल स्तर में कमी और अनियमित वर्षा के कारण जल संकट गहराता जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किए जा रहे प्रयास, जैसे तालाबों का गहरीकरण और वर्षा जल संचयन, इस संकट से निपटने में महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, इन प्रयासों को सफल बनाने के लिए सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है।

युवा पीढ़ी की भूमिका

हुडा हाई स्कूल की छात्राओं का यह प्रयास युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी का एक शानदार उदाहरण है। युवा न केवल भविष्य के कर्णधार हैं, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन के वाहक भी हैं। रंगोली जैसे रचनात्मक माध्यमों के जरिए वे जटिल मुद्दों को सरल और प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचा सकते हैं। शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. संजय मेहता का कहना है, "स्कूलों में जल संरक्षण जैसे विषयों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए। जब बच्चे बचपन से ही इन मुद्दों के प्रति जागरूक होंगे, तो वे बड़े होकर जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।" हुडा हाई स्कूल का यह कार्यक्रम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस कार्यक्रम का प्रभाव केवल स्कूल तक सीमित नहीं रहा। स्थानीय समुदाय के लोगों ने भी इस पहल की सराहना की और जल संरक्षण के लिए अपने स्तर पर प्रयास शुरू करने का वादा किया। कुछ ग्रामवासियों ने बताया कि वे अपने घरों में वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करने पर विचार कर रहे हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान के जिला समन्वयक श्री परमार ने बताया कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम पूरे जिले में आयोजित किए जाएंगे। "हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक गांव में कम से कम एक तालाब या कुआं पुनर्जनन किया जाए। साथ ही, स्कूलों और कॉलेजों में इस तरह के रचनात्मक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।"

न्यूज़ एडिटर

झाबुआ फर्स्ट
झाबुआ फर्स्ट मध्यप्रदेश में स्थापित अग्रणी हिंदी वेब न्यूज़ , वर्ष 2022 में आरएनआई दिल्ली द्वारा साप्ताहिक समाचार पत्र के रूप में पंजीयन के बाद खबरों को ऑनलाइन और प्रिंट दोनों ही माध्यम से प्रकाशित किया जा रहा है।
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