शिवगढ़, 01 मार्च 2025: ग्राम शिवगढ़ में स्थित प्राचीन मनकामनेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ग्राम पंचायत द्वारा दो दिवसीय मेले का भव्य आयोजन किया गया। यह मेला हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए आस्था और उत्साह का केंद्र बना रहा। मंदिर परिसर और इसके आसपास के क्षेत्र में भक्ति, संस्कृति और परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला।
महाशिवरात्रि के इस पर्व पर मंदिर को फूलों, रंग-बिरंगी और आकर्षक रोशनी से सजाया गया था। सुबह से ही मंदिर में भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पुजारियों ने विधि-विधान से महादेव का अभिषेक किया, जिसमें दूध, दही, शहद और गंगाजल का उपयोग किया गया। भक्तों ने "ॐ नमः शिवाय" और "हर हर महादेव" के जयघोष के साथ मंदिर का वातावरण भक्तिमय बना दिया।
पंचायत सरपंच ने बताया कि इस मेले का आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ग्रामीण संस्कृति और एकता को भी बढ़ावा देता है। मेले के पहले दिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें लोक नृत्य, भजन संध्या और नाट्य प्रस्तुतियाँ शामिल थीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इन कार्यक्रमों का आनंद लिया।
दूसरे दिन मेले में स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों ने अपने स्टॉल लगाए, जहाँ हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, मिट्टी के बर्तन और स्वादिष्ट व्यंजनों की बिक्री हुई। मेले में आए लोगों ने खरीदारी के साथ-साथ झूलों और खेल-तमाशों का भी लुत्फ उठाया। बच्चों के लिए विशेष रूप से गुब्बारे और खिलौनों की दुकानें आकर्षण का केंद्र रहीं।
मंदिर के पुजारी ने बताया कि मनकामनेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है और यहाँ आने वाले भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ दूर-दराज से लोग आते हैं और भगवान शिव से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। इस बार मेले में लगभग 10,000 से अधिक श्रद्धालुओं शामिल हुए।
स्थानीय प्रशासन ने भी मेले की व्यवस्था में पूरा सहयोग दिया। सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। इसके अलावा, स्वच्छता और पेयजल की व्यवस्था भी ग्राम पंचायत द्वारा सुनिश्चित की गई थी।
मेले के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं का कहना था कि यह मेला उनके लिए सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि एक ऐसा अवसर है जो उन्हें अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ता है। इस तरह, मनकामनेश्वर महादेव मंदिर का यह दो दिवसीय मेला आस्था, संस्कृति और समुदाय के मिलन का प्रतीक बन गया।
इस आयोजन ने न केवल शिवगढ़ की धार्मिक पहचान को उजागर किया, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आने वाले वर्षों में भी इस मेले की भव्यता और उत्साह बरकरार रहने की उम्मीद है।

